उत्तर प्रदेशसोनभद्र

हरपुरा गांव में परंपरा का भव्य पुनर्जागरण, पालकी में निकली दूल्हे की शाही बारात

विंढमगंज क्षेत्र में अनोखी शादी बनी जनचर्चा, आधुनिकता के बीच जीवंत हुई सदियों पुरानी संस्कृति

विंढमगंज सोनभद्र (राकेश कुमार कन्नौजिया)_
विंढमगंज थाना क्षेत्र के हरपुरा गांव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि परंपराएं केवल इतिहास की बातें नहीं, बल्कि आज भी उन्हें पूरे गर्व और सम्मान के साथ जिया जा सकता है। आधुनिकता के इस तेज़ दौर में, जहां शादियां लग्जरी गाड़ियों, डीजे की धुन और चमक-दमक तक सीमित होती जा रही हैं, वहीं इस गांव में एक ऐसी बारात निकली जिसने हर किसी को ठहरकर देखने और सराहने के लिए मजबूर कर दिया।file 000000005d087206bf36ac2e32792dcc
गांव निवासी मुंद्रिका गुप्ता के पुत्र मनोज गुप्ता ने अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए जो रास्ता चुना, वह न सिर्फ अनोखा था, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक भी बन गया। उन्होंने आधुनिक साधनों को दरकिनार करते हुए पारंपरिक पालकी में बैठकर बारात निकालने का निर्णय लिया। यह निर्णय जैसे ही गांव में फैला, पूरे क्षेत्र में उत्सुकता की लहर दौड़ पड़ी।
शादी के दिन हरपुरा गांव का माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो उठा। रंग-बिरंगे फूलों, पारंपरिक कपड़ों और आकर्षक डिजाइनों से सजी पालकी जब दरवाजे पर आई, तो मानो पुरानी भारतीय परंपरा जीवंत हो उठी। दूल्हा जब उस सजी-धजी पालकी में सवार हुआ, तो यह दृश्य किसी ऐतिहासिक झांकी से कम नहीं लग रहा था। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक धुनों के बीच बारात जैसे ही आगे बढ़ी, गांव की गलियों से लेकर आसपास के क्षेत्रों तक लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
बच्चे, बुजुर्ग और युवा—हर वर्ग के लोग इस अनोखी बारात को देखने के लिए उत्साहित नजर आए। कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन में इस यादगार पल को कैद किया, तो वहीं बुजुर्गों की आंखों में बीते समय की मीठी यादें तैरने लगीं। ग्रामीणों ने बताया कि दशकों पहले इसी तरह पालकी और बैलगाड़ियों से बारातें जाया करती थीं, लेकिन समय के साथ यह परंपरा धीरे-धीरे लुप्त हो गई। आज के दौर में इस तरह का दृश्य देखना अपने आप में एक दुर्लभ अनुभव बन गया है।
बारात जब झारखंड के लिए रवाना हुई, तो यह केवल एक विवाह यात्रा नहीं थी, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित करने की एक सशक्त पहल भी थी। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता को अपनाना जरूरी है, लेकिन अपनी जड़ों और परंपराओं को भूल जाना नहीं।
स्थानीय लोगों और क्षेत्रवासियों ने इस पहल की खुले दिल से सराहना की। उनका कहना है कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का काम करते हैं और समाज में सकारात्मक संदेश देते हैं। हरपुर-हरपुरा गांव की यह अनोखी बारात अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे लंबे समय तक याद रखेंगे।
इस भव्य आयोजन ने न सिर्फ एक शादी को खास बनाया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि जब परंपरा और आधुनिक सोच का संगम होता है, तो वह एक नई मिसाल कायम कर देता है। हरपुरा गांव की यह बारात आने वाले समय में भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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